‘ Jo Hoga , Acha hi Hoga’ – Hindi Story

Jo Hoga,Acha hoga
Jo Hoga,Acha hoga

This is a moral Hindi Story -‘Jo Hoga ,Acha hi Hoga’.If you like this story then comment and share this motivational hindi story.

‘ Jo Hoga ,Acha hi Hoga’ – Hindi Story


     एक राजा शिकार के लिए जंगल गया । साथ ही उसके कुछ सैनिक और सेनापति भी था । शिकार करते समय दुर्घटनावश राजा की एक ऊँगली कट गयी । राजा यह देखकर घबरा गया ।

     सेनापति ने राजा की ऊँगली पर कपड़ा बांधते हुए कहा – ‘ महाराज, घबराइए नहीं ,जो होता है अच्छे के लिए ही होता है ।’
     सुनकर राजा को बुरा लगा की मेरी तो ऊँगली काट गयी है और यह कह रहा है की जो होता है अच्छे के लिए होता है ।अगले दिन महल पहुंचकर राजा ने सेनापति को जेल में बंद करा दिया ।
      कुछ दिन निकल जाने के बाद राजा फिर शिकार करने जंगल गया । परन्तु थोड़ी देर बाद वह रास्ता भटककर सेना से अलग हो गया । जंगल में राजा भटक ही रहा था की जंगल के कुछ आदिवासी आ गए । उन्होंने राजा को बंदी बना लिया और अगले दिन राजा की बलि देने का निश्चय किया ।
     अगले दिन की सुबह राजा को बलि के लिए लाया गया । आदिवासियों का सरदार बलि देने से पहले राजा के पास आया ।उसने राजा को ऊपर से नीचे तक देखा ।तभी उसकी नज़र राजा की कटी हुई ऊँगली पर पड़ी ।
      वह जोर से बोला -‘ अरे इसकी तो ऊँगली कटी हुई है ,देवी ऐसी बलि स्वीकार नहीं करेगी ,इसे वापस जहाँ से लाये वहां छोड़ आओ ।’
       राजा को पुनः वहीँ छोड़कर आदिवासी चले गए ।
      राजा जैसे -तैसे महल पहुंचा । राजा को सेनापति की बात याद आ गयी ।राजा ने सोचा-” वास्तव में अगर उस दिन ऊँगली न कटी होती तो आज जान चली जाती । यानि सेनापति ने सही कहा था जो होता है अच्छे के लिए होता है ।’
      राजा ने तुरंत सेनापति की रिहाई का आदेश दिया ।सेनापति को राजा के पास लाया गया तो राजा ने कहा -“सेनापति तुमने जो कहा था, सही था- जो होता है अच्छे के लिए होता है । उस दिन मेरी ऊँगली कट गयी पर आज उसके कारण ही मेरी जान बची है । परन्तु तुम्हारे लिए वह कैसे अच्छा था , उसके बाद तो तुम्हें जेल हो गयी थी ।”
     सेनापति मुस्कराया और बोला – ” महाराज, अगर आपने मुझे जेल में नहीं डाला होता तो निश्चित रूप से मैं आपके साथ होता और आपके साथ मुझे भी आदिवासी पकड़ लेते । आपको तो ऊँगली के कारण वह छोड़ देते परन्तु मुझे तो सही सलामत पाकर वह बलि दे देते । अतः मेरे लिए भी अच्छा ही हुआ की आपने मुझे जेल में डलवा दिया ,मेरी भी जान बच गयी ।”

    किसी काम को हो जाने के बाद उसे लेकर परेशान नहीं होना चाहिए बल्कि आगे कर्म करते रहना चाहिए । इस सोच के साथ की जो होगा ,अच्छा ही होगा ।

 


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