Hindi Moral Story – ‘Soch’

Hindi moral story - 'Soch'
Hindi moral story - 'Soch'

In this post you can read a Hindi Moral Story – ‘Soch‘.In our progress, role of our thinking level is very important .If you like this hindi moral story -‘Soch’ then comment and share.

Hindi Moral Story -‘Soch’

     एक बार एक व्यक्ति गुब्बारे बेच रहा था । उसके पास नीले , लाल , पीले , हरे कई रंगों के गुब्बारे थे । जब उसको लगता की कोई गुब्बारे खरीदने नहीं आ रहा तो वह उनमें से एक गुब्बारे में हीलियम गैस भरता और उसे हवा में छोड़ देता ।

      हवा में गुब्बारे को उड़ता हुआ देखकर कोई न कोई बच्चा गुब्बारे खरीदने के लिए माता – पिता को ले ही आता ।बच्चे उससे गुब्बारा खरीद लेते और उसकी बिक्री होती जा रही थी ।
      एक दिन की बात है ,वह इसी तरह से गुब्बारे में हीलियम गैस भर उन्हें उड़ा रहा था । दूर से एक बच्चा यह सब देख रहा था । उस बच्चे ने देखा की गुब्बारेवाले हर थोड़ी देर में किसी रंग के गुब्बारे में हवा भरता और उसे हवा में उड़ा देता था ।
     थोड़ी देर यह सब देखने के बाद वह बच्चा उस गुब्बारेवाले के पास पहुँच गया । गुब्बारेवाले ने उसे प्यार से देखा और पूछा – ” तुम्हें कौन से रंग का गुब्बारा चाहिए ?”

      बच्चा बड़ा ही मासूम था । उसने मासूमियत से पूछा – “अगर आप काळा रंग के गुब्बारे में हवा भरोगे और उसे उड़ाओगे तो क्या वह भी हवा में उड़ेगा ? “
      बच्चे की बात सुनकर वह हंसा और बोला – ” गुब्बारा किस रंग का है इसका कोई फर्क नहीं पड़ता , उसको उड़ने के लिए उसमें भरी जाने वाली हवा का योगदान है । “

     यह कहकर उसने एक काले रंग के गुब्बारे में हवा भरकर उसे उड़ा दिया ।बच्चा यह देखकर बड़ा खुश हुआ ।

      कहने का मतलब यही है की हमें ऊपर उठाने में हमारा शरीर का योगदान नहीं होता परन्तु हमारे अंदर क्या है ,इसका योगदान होता है ,मतलब हमारी सोच कैसी है ।यदि हमारी सोच अच्छी हुई तो ही हम ऊपर उठेंगे ,फिर चाहे शरीर कैसा भी हो ।

Share

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*