Hindi Poem आखिर तुम होते कौन हो?

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Hindi Poem आखिर तुम होते कौन हो?

दिल के अंदर की हलचल को बढ़ाकर
उसको ठुकरा देने वाले
तुम होते कौन हो।

धीरे से मुस्कराकर उम्मीद बढ़ाकर,
मुह फेर चले जाने वाले
तुम होते कौन हो।

कहते हो कि साथ नही छोड़ोगे उम्र भर,
पर किसी छोटी सी बात पर
रूठकर चले जाने वाले
तुम होते कौन हो।


शाम जब गिर आती है अपने शबाब पर,
याद में आकर हमारी,
फिर से सताने वाले
तुम होते कौन हो।

जिंदगी में मेरी जब चाहे आ जाते हो,
पर बिना हमे बताकर जाने वाले
तुम होते कौन हो।

रह रहकर जिसके लिए सोचता रहता है दिल,
इस दिल की तड़प को और बढ़ाने वाले
तुम होते कौन हो।

चाहा तो तुम्हें हमने मन ही मन,
मन के मंदिर में गंटी बजाने वाले
तुम होते कौन हो।

आंख लगने पर आ जाते हो,
और आंख खुलते ही चले जाने वाले
आखिर तुम होते कौन हो।

अपने होंठों को दांतों से काटकर
इतराकर मुस्कराने वाले आखिर
तुम होते कौन हो।

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