Hindi Moral Story – Galatfahami

Hindi Moral Story
Hindi Moral Story

This is a hindi moral story.This is about a uncle and his nephew.If you like this hindi moral story “galatfahami” then comment and share this.

Hindi Motal Story-“Galatfahami”

     एक जौहरी की मृत्यु के बाद उसके परिवार पर संकट आ गया। खाने के भी लाले पड़ गए। उसके परिवार में पत्नी और एक बेटा था । एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को हीरों का एक हार देकर कहा- ” बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ और कहना कि हीरों के हार को बेचकर ,वे उन्हें कुछ रुपये दे दे जिसे घर चल सके। “

     बेटा वह हार लेकर चाचाजी के पास गया। चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख-परखकर कहा- ” बेटा, मां से कहना कि अभी बाजार बहुत मंदा है। थोड़ा रुककर बेचना, अच्छे दाम मिलेंगे।” और उसे थोड़े से रुपए देकर कहा कि ‘ तुम कल से चाहो तो दुकान पर आ जाना, यहाँ काम करना मैं उसके बदले कुछ रुपये तुम्हें दे दूंगा ।’

     अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान पर जाने लगा और वहां हीरे-रत्नों की परख का काम सीखने लगा। एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया और लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने आने लगे।

    एक दिन उसके चाचा ने कहा- ” बेटा, अपनी मां से वह हार लेकर आना और कहना कि अब बाजार बहुत तेज है, उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।”

    बेटे ने माँ से घर जाकर हार माँगा । मां से हार लेकर उसने परखा तो पाया कि वह तो नकली है। वह उसे घर पर ही छोड़कर दुकान लौट आया।

     चाचा ने पूछा – “हार नहीं लाए ?”

     उसने कहा- “चाचा वह हार तो नकली था।”

     तब चाचा ने कहा- ” जब तुम पहली बार हार लेकर आए थे, तब मैं उसे नकली बता देता तो तुम सोचते कि आज हम पर बुरा वक्त आया, तो चाचा हमारी चीज को भी नकली बताने लगे और आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया, तो पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।”

     रिश्तों के धागे बड़े अनमोल और कोमल होते हैं । अगर हम कहीं गलतफहमी के शिकार होकर उन्हें तोड़ देते हैं तो हमें बड़ा नुक्सान होता है ।

 

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