Akbar Birbal Story- ” Baal Hath”

Akbar Birbal Story
Akbar Birbal Story

    Akbar birbal story ” baal hath” is a story about birbal’s wisdom and presence of mind.If you like this Akbar Birbal Story then comment and share.

     एक दिन दरबार में बादशाह जब पधारे तो देखा कि बीरबल नहीं है। बीरबल के न रहने से कामकाज बिल्कुल बन्द हो जाता है।आज दरबार में आने के लिए उन्हें स्वाभाविक से ज्यादा देर हो गई थी।

    बादशाह ने अपने दूत को उनको लाने के लिए भेजा। दूत गया, बादशाह का सन्देश सुन बीरबल ने उस नौकर से कह दिया कि – चलो मैं आता हूं।
    नौकर को जब आधा घंटा बीत गया कि बादशाह को बड़ा आश्चर्य हुआ किन्तु उसी क्षण उन्होंने विचार किया कि कुछ जरूरी काम से वह रूके होंगे। बादशाह को अब बीरबल की प्रतीक्षा असहनीय हो उठी, उन्होंने दूसरे नौकर को पुनः भेजा। इस नौकर को भी बीरबल ने वापिस किया।

    नौकर ने आकर कहा-“जहांपनाह, वे कह रहे है-चलो, मैं आता हूं।”

   बादशाह को सुनकर ढाढस बंधा। एक घन्टा फिर बीत चला किन्तु बीरबल का कहीं पता नहीं। बादशाह झुंझला उठे, अब बीरबल के प्रतिद्वन्द्वियों को अवसर मिला। उन्होंने बीरबल की निन्दा कर बादशाह के गुस्से को और भी भड़का दिया, अबकी बार उन्होंने दो सिपाही हथियारबन्द भेजे और हुक्म दिया कि बीरबल को पकड़ लाओ।


    बादशाह का हुक्म मानकर सिपाही वहां गए किन्तु उन्हें पकड़कर ले चलना हंसी-खेल न था। सब सिपाही भय से कांप रहे थे डरते-डरते एक सिपाही ने बादशाह का सन्देश सुनाया। यह सुनते ही बीरबल समझ गए कि देर करना उचित नहीं है, वे शीघ्र कपडे़ आदि बदलकर उन्हीं सिपाहियों के साथ सभाभवन के लिए चल दिए।
     दरबार में पहुंचकर बादशाह को अदब से सलाम कर अपने स्थान पर बैठ गए। बादशाह ने बीरबल से हुक्म-अदूली का कारण पूछा। बीरबल बोले-“आलीजहां मेरा छोटा लड़का रो रहा था, मैं उसे बहलावा देकर चुप करवाना चाहता था। अभी तक वह शांत न हो सका था।”
 

    यह सुनकर बादशाह बोले,“यह तुम्हारी कोरी बनावटी बात है। लड़के को बहलावा देने के बहाने तुम मुझको बहलाते हो। अच्छा बताओ, ऐसी कौन-सी बात थी जिसे लड़का नहीं मानता था? जो वह चाहता था उसे दे देते तो लड़का नहीं रोता। तुमने मेरी आज्ञा का उल्ल्ंघन किया। यह अच्छा नहीं हुआ, यदि सचमुच तुम लड़के का रोना प्रमाणित नहीं करोगे। तो तुम्हें निश्चित ही सजा दी जायेगी।”
    बीरबल बोले-“जहांपनाह, मैंने लड़के को शांत करने का बहुत प्रयत्न किया किन्तु असफल रहा।”
    बादशाह के पूछने पर बीरबल ने कहा। बीरबल ने आगे बताया- “जहांपनाह सुनिए, मैं शुरू से अन्त तक सब बातें बतलाता हूं,लड़का रो रहा था। मैंने उससे पूछा बेटा क्या लेगा? क्यों रो रहा है?”

    पहले तो उसने मेरी बातों को सुनी-अनसुनी कर दिया। जब मैं लगातार पूछता ही रहा तो वह बोला-” गन्ना लूंगा।”

    मैं उसे लेकर बाजार गया , जहां गन्ना बिक रहा था। मैंने बंधे बोझ की तरफ इशारा किया कि जो चाहे ले लो किन्तु उसे सन्तोष न हुआ और बोला, उसमें से तुम्हीं अच्छे गन्ने निकाल दो। मैंने वैसा ही किया। किन्तु उसे तो रोने की धुन सवार थी। वह फिर रोने लगा। पूछने पर ज्ञात हुआ कि छिलवाकर गंडेरियां बनवाकर खाना चाहता है।

    मैंने पुनः वैसा ही किया। गंडेरियां चूसते-चूसते जब पेट भर गया तो उसने चूसने से इंकार कर दिया। मैंने अन्यत्र बहलाने का बहुतेरा उपाय किया किन्तु असफल रहा। कुछ देर चुपचाप रहने के बाद उसने फिर रोना-पीटना शुरू कर दिया। जब पूछने पर ज्ञात हुआ कि वह चाहता है कि चूसी हुई गंडेरियों के छिलके को जोड़कर पहले जैसे ही गन्ने का बण्डल तैयार कर दो।
    मैंने बहुत समझाया-बुझाया पर सब बेकार था। लाचार होकर मैंने मजबूरी प्रकट की। तब वह बोला कि जब तक वैसा इन्हें नहीं बना दोगे तब तक मैं रोना नहीं छोडूंगा। अब भला आप ही बताइए कि मैं उसे कैसे बहला दूं?
    बादशाह यह घटना सुन बड़े आश्चर्यचकित हुए। बीरबल से बोले-“सच है, लड़कों को खुश करना बड़ा ही कठिन है।”
   बादशाह का गुस्सा शांत हो गया और वे बीरबल के सत्य भाषण से बहुत खुश हुए।

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