तो क्या हिंदी कविता

hindi poem
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करते रहे इन्तेजार उनके मुस्कराने का
मुस्कुरा कर भी वो हमारे न हुए ,तो क्या

बात तो थी दोपहर में मिलने की
वो शाम ढलने तक भी न आये ,तो क्या

जिंदगी चल रही थी यू भी हमारी,
पास आकर भी वो दूर हुए, तो क्या।

वादा था उम्र भर साथ निभाने का,
बीच राह में ही बिछड़ गए ,तो क्या

दोस्ती तो शिद्दत से की थी हमने
वो निभाने से चुक गए ,तो क्या।

जो बिताये संग वो पल याद हैं अब भी,
उनको अब याद नही ,तो क्या।

वो ख़ुश हैं जिंदगी में मेरे बिना भी,
हैम खुश रहें या न भी रहे, तो क्या।

कहना तो थी तुमसे दिल की बात,
सुनाने को मौका न मिले, तो क्या।

करते रहे हैम उनके लिए ही सब कुछ
वो फिर भी न समझ पाए,
तो क्या।

पता है हमारे बिना भी तुम खुश रह लोगे,
हैम रह पाए या न रह पाए ,तो क्या।

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